maths लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
maths लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 14 नवंबर 2017

त्रिभुज का क्षेत्रफल( area of triangles)

त्रिभुज का क्षेत्रफल

उद्देश्य:

यह दर्शाना कि एक त्रिभुज का क्षेत्रफल उसके आधार व ऊंचाई के गुणनफल का आधा होता है।

पूर्व-आवश्यक ज्ञान:

एक आयत का क्षेत्रफल उसकी लम्बाई व ऊंचाई का गुणनफल होता है।एक समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके आधार व ऊंचाई का गुणनफल होता है।एक समांतर चतुर्भुज का विकर्ण उसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में बांट देता है।

 

सिद्धांत:

त्रिभुज:

त्रिभुज ज्यामिती में आधारभूत आकारों में से एक है: एक बहुभुज जिसके तीन कोने या शीर्ष होते हैं और तीन भुजाएं या धार जो कि रेखा खंड होते हैं।

 

 

त्रिभुजों के प्रकार:

 

सम कोण त्रिभुज:

 

एक सम कोण त्रिभुज में अंतः कोणों में से एक का माप 90° होता है। सम कोण के विपरीत भुजा कर्ण होती है; वह त्रिभुज की सबसे लम्बी भुजा होती है। भुजाओं a, b, c के एक सम कोण त्रिभुज के लिए जिसमें c कर्ण हो, a2 + b2 = c2.

न्यून कोण त्रिभुज:

एक त्रिभुज जिसके सभी अंतः कोणों का माप 90° से कम हो, न्यून त्रिभुज या न्यून कोण त्रिभुज कहलाता है। भुजाओं a, b, c के एक सम कोण त्रिभुज के लिए जिसमें c सबसे बड़ी भुजा हो, a2 + b2 > c2

 

अधिक कोण त्रिभुज:

एक त्रिभुज जिसके एक अंतः कोण का माप 90° से अधिक हो, अधिक त्रिभुज या अधिक कोण त्रिभुज होता है। भुजाओं a, b, c के एक अधिक कोण त्रिभुज के लिए जिसमें c सबसे बड़ी भुजा हो, a2 + b2 < c2

शनिवार, 11 नवंबर 2017

Scientist गणितज्ञ

एक गणितज्ञ वह व्यक्ति होता है जिसके अध्ययन और अनुसंधान का प्राथमिक क्षेत्र गणित ही रहता है।

लियोनार्ड यूलर को हमेशा से एक प्रसिद्ध गणितज्ञ माना गया है

गणित की समस्यायें

गणित के क्षेत्र में नयी खोजों का प्रकाशन बहुत ऊँची दर पर सैकडो वैज्ञानिक पत्रिकाओ (scientific journal) में जारी है। हाल ही में हुआ एक रोमांचक विकास है, एंड्रयू विल्स (proof) के द्वाराफ़र्मत की आखिरी प्रमेय (Fermat's Last Theorem) का प्रमाणित होना (Andrew Wiles), ३५० वर्षों से मेधावी गणितज्ञ इस समस्या को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।

गणित में कई प्रसिद्ध खुली समस्याएँ हैं, सैंकडों नहीं तो पिछले कुछ दशकों में तो हैं ही. कुछ उदाहरणों में शामिल हैं रिएमन्न परिकल्पना (Riemann hypothesis) (१८५९) और गोल्डबच का अनुमान(Goldbach's conjecture) (१७४२) .सहस्राब्दी पुरस्कार समस्याएँ (Millennium Prize Problems) गणित की पुरानी और महत्वपूर्ण समस्याओं पर प्रकाश डालता है और इनमें से किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए १,०००, ०००अमरीकी डॉलर का पुरस्कार देता है। इनमें से एक समस्या थी, रूसी गणितज्ञ Grigori पेरेलमान(Grigori Perelman) के द्वारा सिद्ध पोंकारे अनुमान (Poincaré conjecture) (१९०४), जो २००३ में एक पेपर में जारी की गई, समकक्ष समूह के द्वारा समीक्षा २००६ में पूरी हुई और प्रमाण को मानी स्वीकृत किया गया।

प्रेरणा

गणितज्ञ आमतौर पर गणित के पैटर्न के विवरण व खोज में और प्रमेय के प्रमाण ढूँढने में रूचि रखते हैं .अधिकतर प्रमेय और समस्याएँ स्वयं गणित से ही आते हैं या फिर सैद्धांतिक भौतिकी से प्रेरित होतें हैं(theoretical physics). कुछ हद तक, गणित की समस्याएं अर्थशास्त्र, खेल और संगणक विज्ञान से आयी हैं.कुछ कठिन प्रश्न केवल इसलिए दिये जातें हैं ताकि उसे हल करने में चुनौती जैसा अनुभव हो I यद्यपि बहुत सी गणित तुंरत उपयोगी नहीं है, लेकिन इतिहास से पता चलता है कि गणित के अनुप्रयोग बाद में पता चल जाते हैं। उदहारण के लिए, ऐसा लगता है की संख्या सिद्धांत (number theory) का वास्तविक दुनिया में कोई उद्देश्य नहीं है, लेकिन कम्प्यूटर के विकास के बाद अल्गोरिद्म और बीज-लेखन में इसके महत्वपूर्ण अनुप्रयोग का पता चला.

गणितज्ञों को नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाता है Iफील्ड्स पदक (Fields Medal) गणित के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ व् प्रतिष्ठित पुरस्कार है Iयह पदक जिसे कभी - कभी गणित का " नोबल पुरस्कार " भी कहा जाता है, प्रत्येक चार वर्ष में एक बार चार जवान गणितज्ञों को (४० वर्ष से कम), जो प्रतिभाशाली हैं, दिया जाता है। अन्य प्रमुख पुरस्कार हैं abel पुरस्कार (Abel Prize), नेमर्स पुरस्कार(Nemmers Prize), वुल्फ पुरस्कार (Wolf Prize), Schock पुरस्कार (Schock Prize) और नेवानलिना पुरस्कार (Nevanlinna Prize).

अंतर

गणित प्राकृतिक विज्ञान से भिन्न है, क्यों की विज्ञान में भौतिक सिद्धांतों को प्रयोगों के द्वारा जांचा जाता है, जबकि गणितीय तथ्यों को सत्यापित किया जाता है, यह कार्य गणितज्ञों को द्वारा किया जाता है। यदि किसी निश्चित तथ्य को गणितज्ञ के द्वारा सत्यापित कर दिया जाता है, (प्रारूपिक रूप से क्यों कि विशेष मामलों में कुछ हद तक सत्यापन किया गया है) लेकिन इसे सिद्ध या असिद्ध नहीं किया गया है, तो यह अनुमान (conjecture) कहलाता है: इसके विरोधाभास में एक सिद्ध तथ्य प्रमेय कहलाता है। भौतिक सिद्धांतों के बदलने की उम्मीद की जा सकती है जब कभी इस भौतिक संसार के बारे में कोई नई जानकारी प्राप्त होती है। गणित एक अलग तरीके से बदलती है: नए विचार पुराने विचारों को झूठ साबित नहीं कर सकते लेकिन ये किसी भी पूर्व ज्ञात तथ्य कोव्यापक बनाने में काम आते हैं। उदाहरण के लिए एक चर कलन, बहु चर कलन (multivariable calculus) में व्यापक हो जाता है, जो विश्लेषण पर बहु गुणित (manifold) हो जाता है।बीजीय रेखागणित (algebraic geometry) का अपने पारंपरिक रूप से आधुनिक रूप में विकास इस बात का एक अच्छा उदहारण है कि गणित का क्षेत्र मोलिक रूप से बदल जाता है, लेकिन यह इस बात को साबित नहीं करता कि पहले सत्यापित किया गया तथ्य किसी भी प्रकार से ग़लत है। हालांकि एक प्रमेय, जब एक बार सिद्ध हो जाती है, हमेशा के लिए सच बन जाती है, प्रमेय का वास्तविक अर्थ हमें गहराई से तब समझ में आता है, जब प्रमेय के चारों तरफ़ की गणित बढती है। एक गणितज्ञ महसूस करता है कि एक प्रमेय को ज्यादा बेहतर रूप से समझा जा सकता है जब यह पूर्व ज्ञात तथ्य पर विस्तृत रूप से लागू की जाती है। उदाहरण के लिए nonzero integers modulo a prime के लिएफर्मेट का लिटिल प्रमेय (Fermat's little theorem), युलर की प्रमेय (Euler's theorem) के रूप में व्यापक हो जाती है, जो invertible numbers modulo any nonzero integer, के लिए है। यही व्यापक होकर परिमित समूहों के लिए लाग्रेंग की प्रमेय (Lagrange's theorem) बन जाती है।

बुधवार, 19 जुलाई 2017

मैथ्‍स में अच्‍छे मार्क्‍स के लिए ऐसे करें तैयारी

मैथ्‍स में अच्‍छे मार्क्‍स के लिए ऐसे करें तैयारी

ऐसे करें तैयारी
टर्म 1 के एग्‍जाम्‍स में अब बस कुछ ही दिन रह गए हैं. ऐसे में अगर आप मैथ्स में अच्छे मार्क्स लाना चाहते हैं तो ये टिप्स आपके काम आ सकते हैं...
1. उन चैप्टर्स पर नजर ज्यादा रखें, जिनसे सबसे ज्यादा सवाल पूछे जाते हैं.
2. पिछले पांच साल के क्वेश्‍चन पेपर सॉल्व करें. इससे आपको यह अंदाजा लग जाएगा कि परीक्षा में किस तरह के सवाल पूछे जाते हैं.
3. तैयारी कितनी भी अच्छी क्यों न हो, आप जब तक रिवीजन नहीं करेंगे, मार्क्स अच्छे नहीं आ सकते. क्योंकि रिवीजन के दौरान ही कई डाउट्स क्लीयर होते हैं.
4. जो भी पढ़ें उसका शॉर्ट नोट्स बनाते रहें. परीक्षा में जब कम समय बचेगा तब रिवीजन में इससे मदद मिलेगी.
5.जिन विषयों में आप कमजोर हैं, उनकी तैयारी पहले करें.
6. परीक्षा है इसका मतलब यह नहीं कि आप हर समय पढ़ते ही रहें. बेहतर होगा कि आप पढ़ाई के बीच थोड़ा वक्त निकालकर टीवी देखें, खेलें, परिवार से बात आदि करें. इससे आपका दिमाग रिफ्रेश होगा और आप अच्छी तरह पढ़ाई कर पाएंगे.
7. मैथ्स एक ऐसा विषय है, जिसकी प्रैक्ट‍िस आप जितनी ज्यादा करेंगे, मार्क्स उतने ही अच्छे आएंगे. दिन में कम से कम तीन से चार घंटे मैथ्स बनाएं और फिर देखें मैथ्स में कितने अच्छे मार्क्स आते हैं.