गुरुवार, 1 नवंबर 2018

पायथागोरस प्रमेय

पायथागोरस प्रमेय  
गणित में, पायथागोरस  प्रमेय समकोण  त्रिभुज (सम-कोण त्रिभुज) की तीनों  भुजाओं के बीच  यूक्लिडियन  ज्यामिति में एक संबंध है।

क्षेत्रफल के अर्थ में, यह बताता है : किसी भी समकोण त्रिभुज में, उस वर्ग का क्षेत्रफल जिसकी भुजा कर्ण है (समकोण की सम्मुख भुजा), उन वर्गों के क्षेत्रफलों के योगफल के बराबर होता है जिनकी भुजाएं दो पाद (लेग) (समकोण पर मिलने वाली दो भुजाएं) होती हैं।
                                                                                        or
किसी समकोण त्रिभुज में समकोण बनाने वाली भुजाओ के वर्गो का योग तीसरी   भुजा के वर्ग के बराबर होता है
AB2=BC2+CA2


पाइथागोरस प्रमेय
                                                                         
                                                                                                              चित्र( १ )

प्रमेय को भुजाओं a, b और c की लंबाइयों के बीच संबंध बनाते हुए समीकरण के रूप में लिखा जा सकता है, जिसे पायथागोरस समीकरण a^2+b^2=c^2 कहते हैं। जहां c कर्ण की लंबाई को दर्शाता है, और a तथा b अन्य दो भुजाओं की लंबाइयों को दर्शाता है।

उदाहरण :-


दिए गए समकोण त्रिभुज ABC में AB की लंबाई कितनी है?
पायथागोरस प्रमेय द्वारा, हम देखते हैं :
AB2=BC2+CA2

सोमवार, 22 जनवरी 2018

गोले का आयतन

गोले का आयतन

उद्देश्य :

 गोले की त्रिज्या के पदों में इसके आयतन के सूत्र का एक सांकेतिक नमूना प्रदान करना।

 

संबंधित शब्दावलियां

गोला :

                                                                                                               

                                                                          

गोला एक पूरी तरह से गोल ज्यामितीय और वृत्ताकार वस्तु है जो त्रि-आयामी फैलाव में होता है और जो संपूर्ण रूप से गोल गेंद की तरह दिखाई देता है।  

व्यास :  

व्यास एक सीधी रेखा होती है जो वृत्त या गोले के केंद्र से गुजरती है और प्रत्येक सिरे पर परिधि अथवा सतह से मिलती है।  

त्रिज्या :  

किसी गोले की त्रिज्या केंद्र और वृत्त या गोले पर स्थित किसी बिंदु के बीच एक रेखाखंड होती है।  

आयतन : 

गोले के आयतन को निम्न अनुसार परिभाषित किया जाता है :  V = ⁴⁄₃πr³.

इस समीकरण में "V” आयतन को और "r” गोले की त्रिज्या को निरूपित करता है।

गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

समांतर चतुर्भुज की विशेषताएं

समांतर चतुर्भुज की विशेषताए

उद्देश्य :

समचतुर्भुज के विकर्णों से संबंधित विशेषता में समानताओं और भिन्नताओं का पता लगाना। 

समांतर चतुर्भुज

परिभाषा

यह वह चतुर्भुज है जिसमें सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर होते हैं। चतुर्भुज ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।

                                   

विशेषताएं :

किसी समांतर चतुर्भुज का विकर्ण इसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में विभाजित करता है (▲ ADB सर्वांगसम ▲ ABC)।किसी समांतर चतुर्भुज के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।सम्मुख भुजाएं सर्वांगसम होती हैं (AB = DC)।सम्मुख कोण सर्वांगसम होते हैं (∠ADC= ∠ABC)।क्रमागत कोण पूरक होते हैं (∠DAB + ∠ADC = 180°)।यदि एक कोण समकोण हो तो, सभी कोण समकोण होते हैं।

                                  

वृत्त का क्षेत्रफल, area of circle

वृत्त का क्षेत्रफल
   
उद्देश्य :

उस सूत्र का सांकेतिक नमूना देना कि वृत्त का क्षेत्रफल उसके परिमाप व त्रिज्या के गुणनफल का आधा होता है।

सिद्धांत:

वृत्त:  वह एक तल में उन सभी बिन्दुओं का समूह होता है जो एक दिए गए बिन्दु, केन्द्र, से दी गई दूरी पर होते हैं।
नीचे काले रंग में परिधि (C), हरित नीले रंग में व्यास (D), लाल रंग में त्रिज्या, और गहरे गुलाबी रंग में केन्द्र (O) का एक वृत्त है:

 

 

संबंधित शब्दावलियां :

केन्द्र: वृत्त के अन्दर एक बिन्दु। वृत्त पर सभी बिन्दु केन्द्र बिन्दु से समान दूरी पर होते हैं।
त्रिज्या: त्रिज्या केन्द्र से वृत्त पर किसी भी बिन्दु की दूरी होती है। वह व्यास की आधी होती है।
चाप: वृत्त पर दो बिन्दुओं को जोड़ने वाला एक सरल रेखा का खंड।
व्यास: केन्द्र से गुज़रने वाली किसी भी चाप की लम्बाई। वह त्रिज्या की दोगुनी होती है।
परिधि: परिधि वृत्त का परिमाप होती है। वह  होती है।
क्षेत्रफल: वृत्त द्वारा घेरे गए क्षेत्र का क्षेत्रफल। वह   होता है।

वृत्त के गुण:

चाप के लम्बवत त्रिज्या चाप को समद्विभाजित करती है।  वृत्त का व्यास उसकी सबसे लम्बी चाप होती है।

त्रिभुज का अंतः केंद्र


त्रिभुज का अंत:केंद्र

उद्देश्य :

इस बात की व्याख्या करना कि किसी त्रिभुज के कोणों का अंत: समद्विभाजक एक ही बिंदु (जिसे अंत: केंद्र कहते हैं) पर मिलते हैं, जो हमेशा त्रिभुज के अंदर स्थित होता है।

संबंधित शब्दावलियां

अंत:केंद्र - त्रिभुज के अंत:केंद्र को त्रिभुज के अंत: कोण समद्विभाजक के प्रतिच्छेद बिंदु के रूप में परिभाषित किया जाता है। अंत: समद्विभाजक से हमारा अर्थ है किसी त्रिभुज के अंत: कोणों के कोण समद्विभाजक। चूंकि किसी त्रिभुज में तीन अंत: कोण होते हैं, इसलिए तीन अंत: समद्विभाजक अवश्य होंगे। सभी तीन अंत: समद्विभाजक का प्रतिच्छेद बिंदु वृत्त का अंत: केंद्र कहलाता है।अंत:वृत्त (अंतर्वृत्त) - ज्यामिति में, किसी त्रिबुज का अंत:वृत्त या अंतर्वृत्त त्रिभुज में निहित सबसे बड़ा वृत्त होता है; यह तीनों भुजाओं को स्पर्श (टेंजेंट होता है) करता है। अंत:वृत्त का केंद्र त्रिभुज का अंत:केंद्र कहलाता है।

 

            

विशेषताएं :

अंत:वृत्त त्रिभुज के तीनों कोण समद्विभाजकों के प्रतिच्छेद बिंदु द्वारा निर्मित त्रिभुज के संगमन बिंदुओं में से एक है।

ये तीन कोण समद्विभाजक हमेशा संगामी होते हैं और हमेशा त्रिभुज के अंत: भाग में मिलते हैं (ऑर्थोसेंटर के विपरीत जो अंत: भाग में प्रतिच्छेद कर सकते हैं या नहीं भी)। अंत:केंद्र अंत:वृत्त का केंद्र है। अंत:केंद्र त्रिभुज में स्थित एक बिंदु है जिससे भुजाओं की दूरी समान होती है।

यदि त्रिभुज अधिक कोण है तो अंत:केंद्र त्रिभुज के अंत: भाग में स्थित होता है।

यदि त्रिभुज न्यूनकोण है तो भी अंत:केंद्र त्रिभुज के अंत: भाग में स्थित होता है।

यदि त्रिभुज समकोण है तो भी अंत:केंद्र त्रिभुज के अंत: भाग में स्थित होता है।

 

 

बुधवार, 29 नवंबर 2017

एक त्रिभुज का परिकेंद्र

एक त्रिभुज का परिकेन्द्र

लक्ष्य:

यह दर्शाना कि एक त्रिभुज की भुजाओं के लम्ब समद्विभाजक एक बिन्दु पर (जिसे परिकेन्द्र कहा जाता है) संगामी होते हैं और वह बिन्दु एक न्यूनकोणीय त्रिभुज के अन्दर होता है, समकोणीय त्रिभुज के कर्ण पर तथा अधिककोणीय त्रिभुज के बाहर होता है।

 

परिकेन्द्र

परिभाषा

त्रिकोण का परिकेन्द्र उसके तीनों लम्ब समद्विभाजकों का परिच्छेद बिन्दु होता है। यह वहां होता है जहां “लम्ब समद्विभाजक” (वे रेखाएं जो प्रत्येक भुजा के मध्य बिन्दु से समकोण पर होती हैं) मिलते हैं। त्रिकोण का परिकेन्द्र शीर्ष बिन्दुओं से समदूरस्थ होता है तथा परिकेन्द्र के तीनों शीर्ष बिन्दुओं प्रत्येक से परिकेन्द्र की दूरी त्रिकोण की परि-त्रिज्या कहलाती है।

गुण

1) त्रिकोण के समस्त शीर्ष बिन्दु परिकेन्द्र से समदूरस्थ होते हैं।

2) परिकेन्द्र परिवृत्त का केन्द्र भी होता है।

3) न्यूनकोणीय त्रिभुज के लिए, वह त्रिभुज के अन्दर होता है (चित्र (a)) देखें।

4) अधिककोणीय त्रिभुज के लिए, वह त्रिभुज के बाहर होता है (चित्र (c)) देखें।

5) समकोणीय त्रिभुज के लिए, परिकेन्द्र कर्ण का मध्य-बिन्दु होता है (चित्र (b)) देखें।

                                   चित्र (a)       



                               चित्र (b)

 

                     चित्र (c)

त्रिभुज का केंद्रक

त्रिभुज का केन्द्रक

लक्ष्य:

यह दर्शाना कि एक त्रिभुज की मध्य रेखाएं एक बिन्दु (केन्द्रक) से होकर गुज़रती हैं; जो हमेशा त्रिभुज के अन्दर होता है।  

सिद्धांत:

एक त्रिभुज का केन्द्रक वह बिन्दु होता है जहां त्रिभुज की तीन मध्यरेखाएं मिलती हैं। त्रिभुज की मध्यरेखा एक शीर्ष से त्रिकोण की विपरीत भुजा के मध्य-बिन्दु तक रेखा खंड होती है। केन्द्रक को त्रिभुज का गुरुत्व केन्द्र भी कहा जाता है। यदि आपके पास एक त्रिकोणीय प्लेट हो तो उसे अपनी उंगली पर संतुलित करने की कोशिश कीजिए। जब आप वह बिन्दु पा लें जहां वह प्लेट संतुलित हो जाए, वही उस त्रिभुज का केन्द्रक होगा।   

केन्द्रक के गुण:

● वह हमेशा त्रिभुज के अन्दर होता है।

● केन्द्रक प्रत्येक मध्यरेखा को 2:1 के अनुपात में बांटता है। दूसरे शब्दों में, केन्द्रक हमेशा किसी भी मध्यरेखा के सहारे 2/3 दूरी पर होगा।

● नीचे दिए गए चित्रों में c, त्रिभुज (a, b & c) का केन्द्रक है।

       

   न्यून-कोणीय (a)                                                सम-कोणीय (b)                                         अधिक-कोणीय (c)

रविवार, 19 नवंबर 2017

समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल

समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल

उद्देश्य :

यह दर्शाना कि समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल इसके आधार और ऊंचाई का गुनणफल होता है।

सिद्धांत :

समांतर चतुर्भुज एक सरल चतुर्भुज होता है जिसमें समांतर भुजाओं के दो एक युग्म होते हैं।

विशेषताएं :

समांतर चतुर्भुज की विपरीत या सम्मुख भुजाओं की लंबाई समान होती है।समांतर चतुर्भुज के सम्मुख कोणों की माप समान होती है।समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएं समानांतर होती हैं (परिभाषा द्वारा) और इसलिए वे कभी भी एक दूसरे को नहीं काटती।समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल इसके किसी एक विकर्ण द्वारा निर्मित त्रिभुज के क्षेत्रफल का दुगुना होता है।समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार X ऊंचाई।

उदाहरण :

समांतर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल ज्ञात करें जिसका आधार 24 मी और ऊंचाई 17 मी है।

हल :

समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार X ऊंचाई।

                                        =24 X 17

                                        =408

∴ समांतर चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल 408 मी2 है।

 

शनिवार, 18 नवंबर 2017

समचतुर्भुज का क्षेत्रफल

समचतुर्भुज का क्षेत्रफल

लक्ष्य

यह दर्शाना कि समचतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके विकर्णों के गुणनफल का आधा होता है।

सिद्धांत

समचतुर्भुज एक सरल चतुर्भुज (अ-सवयं-प्रतिच्छेदन करने वाला)होता है जिसकी सभी चार भुजाएं बराबर लम्बाई की होती हैं।यदि किसी समांतर चतुर्भुज की दो क्रमानुगत भुजाएं सर्वांगसम हों, तो वह एक समचतुर्भुज होता है।यदि दो त्रिकोण सर्वांगसम हों तो उनका क्षेत्रफल बराबर होता है।त्रिकोण का क्षेत्रफल = 1/2 X आधार X ऊंचाईआयत का क्षेत्रफल = लम्बाई X चौड़ाई

प्रमाण

उपरोक्त चित्र में EHGF समचतुर्भुज है जिसका विकर्ण HF (लम्बाई d1) और विकर्ण EG (लम्बाई d2) है।

समचतुर्भुज EHGF का क्षेत्रफल = त्रिकोण EFH का क्षेत्रफल + त्रिकोण FHG का क्षेत्रफल

    

    

    

    

    

    = विकर्णों के गुणनफल का आधा

उदाहरण
 

निम्न समचतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात करें।

हल:

दिए गए चित्र में,

PR = d1= 24 सेमी

SQ = d2 = 18 सेमी

अतः समचतुर्भुज PQRS का क्षेत्रफल 216 सेमी2  है।

 

बुधवार, 15 नवंबर 2017

समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल

समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल
उद्देश्य :

यह दिखाना कि किसी समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल इसकी ऊंचाई और इसकी समांतर भुजाओं के गुणनफल के बराबर होता है।

 

सिद्धांत

समलंब चतुर्भुज वह चतुर्भुज है जिसमें सम्मुख भुजाओं का एक युग्म समांतर होता है।कोई चतुर्भुज एक समांतर चतुर्भुज होता है यदि इसकी सम्मुख भुजाओं का एक युग्म समांनतर हो और एक दूसरे के बराबर हो।समलंब चतुर्भुज की समांतर भुजाओं को “आधार” कहा जाता है और अन्य दो भुजाओं को समलंब चतुर्भुज का “पाया” कहा जाता है।समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल = आधार (b) X ऊंचाई (h)

 

प्रमाण :

समलंब चतुर्भुज ABCD पर विचार करें। AB और DC समलंब चतुर्भुज ABCD के आधार (समांतर भुजाएं) हैं और ऊंचाई h है।

समलंब चतुर्भुज ABCD की प्रतिकृति बनाकर और इसे BC को स्पर्श कराते हुए उल्टी स्थिति में रखकर एक समांतर चतुर्भुज का निर्माण किया जा सकता है, जैसा कि नीचे के चित्र में दिखाया गया है :

 

 

हम देखते हैं कि दो समलंब चतुर्भुजों ABCD और BSPC को जोड़ने पर समांतर चतुर्भुज ASPD का निर्माण होता है।

इसलिए समलंब चतुर्भुज ABCD का क्षेत्रफल = 1/2 X समांतर चतुर्भुज ASPD का क्षेत्रफल

= ½ X DP X h

= 1/2 X (DC+CP) X h

=1/2 X (b1 + b2) X h

= ½ X (AB + DC) X h

इस प्रकार, किसी समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल इसकी ऊंचाई और इसकी समांतर भुजाओं के गुणनफल के बराबर होता है।

उदाहरण :-

निम्नलिखित समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात करें।

 

 

हल :-

दिया गया है,

b1= 5 सेमी

B2= 11 सेमी

h= 8 सेमी

समलंब चतुर्भुज का क्षेत्रफल = 1/2(b1+b2) X h

=1/2(11+5) X 8

=64 वर्ग सेमी

मंगलवार, 14 नवंबर 2017

त्रिभुज का क्षेत्रफल( area of triangles)

त्रिभुज का क्षेत्रफल

उद्देश्य:

यह दर्शाना कि एक त्रिभुज का क्षेत्रफल उसके आधार व ऊंचाई के गुणनफल का आधा होता है।

पूर्व-आवश्यक ज्ञान:

एक आयत का क्षेत्रफल उसकी लम्बाई व ऊंचाई का गुणनफल होता है।एक समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके आधार व ऊंचाई का गुणनफल होता है।एक समांतर चतुर्भुज का विकर्ण उसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में बांट देता है।

 

सिद्धांत:

त्रिभुज:

त्रिभुज ज्यामिती में आधारभूत आकारों में से एक है: एक बहुभुज जिसके तीन कोने या शीर्ष होते हैं और तीन भुजाएं या धार जो कि रेखा खंड होते हैं।

 

 

त्रिभुजों के प्रकार:

 

सम कोण त्रिभुज:

 

एक सम कोण त्रिभुज में अंतः कोणों में से एक का माप 90° होता है। सम कोण के विपरीत भुजा कर्ण होती है; वह त्रिभुज की सबसे लम्बी भुजा होती है। भुजाओं a, b, c के एक सम कोण त्रिभुज के लिए जिसमें c कर्ण हो, a2 + b2 = c2.

न्यून कोण त्रिभुज:

एक त्रिभुज जिसके सभी अंतः कोणों का माप 90° से कम हो, न्यून त्रिभुज या न्यून कोण त्रिभुज कहलाता है। भुजाओं a, b, c के एक सम कोण त्रिभुज के लिए जिसमें c सबसे बड़ी भुजा हो, a2 + b2 > c2

 

अधिक कोण त्रिभुज:

एक त्रिभुज जिसके एक अंतः कोण का माप 90° से अधिक हो, अधिक त्रिभुज या अधिक कोण त्रिभुज होता है। भुजाओं a, b, c के एक अधिक कोण त्रिभुज के लिए जिसमें c सबसे बड़ी भुजा हो, a2 + b2 < c2

सोमवार, 13 नवंबर 2017

मध्य बिंदु प्रमेय

मध्य बिंदु प्रमेय
लक्ष्य:

एक त्रिकोण के लिए मध्य-बिन्दु प्रमेय की पुष्टि करना।

प्रमेय:

“त्रिकोण की दो भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को जोड़ने वाला रेखाखंड उसकी तीसरी भुजा के समांतर होता है तथा तीसरी भुजा की आधी लम्बाई के बराबर होता है।“

मूलभूत अवधारणाएं तथा तथ्य :

समांतर रेखाएं: 

दो रेखाएं समांतर होती हैं यदि उनका किसी भी बिन्दु पर मेल नहीं होता है।

सर्वांगसम त्रिभुज:

दो त्रिकोण सर्वांगसम होते हैं यदि उनके संगत कोण तथा संगत भुजाएं बराबर हों।

समान त्रिकोण:

दो त्रिकोण समान होते हैं यदि उनके संगत कोण बराबर हों तथा उनकी संगत भुजाएं अनुपात में हों।

 

प्रमेय का प्रमाण:
 


   
आकृति A में दिया गया है:

AP=PB, AQ=QC.

यह सिद्ध करना है कि:

 PQ || BC  तथा  PQ=1/2 BC

योजना:

यह सिद्ध करना है कि ▲ APQ ≅ ▲ QRC

प्रमाण के चरण:

              1. AQ=QC [मध्यबिन्दु]
              2. ∠ APQ = ∠QRC [एक अनुप्रस्थ रेखा द्वारा काटी गई समांतर रेखाओं के लिए संगत कोण]।
              3. ∠PBR=∠QRC=∠APQ [एक अनुप्रस्थ रेखा द्वारा काटी गई समांतर रेखाओं के लिए संगत कोण]।
              4. ∠RQC=∠PAQ [जब किसी त्रिभुज में संगत कोणों के दो जोड़ सर्वांगसम होते हैं, तो तीसरा जोड़ भी सर्वांगसम होता है]।
              5. अतः, ▲APQ ≅ ▲QRC
              6. AP=QR=PB  तथा  PQ=BR=RC.

चूंकि मध्य बिन्दु विरले हैं, और बिन्दुओं को जोड़ने वाली रेखाएं विरली हैं, यह कथन प्रमाणित होता है।

 

शनिवार, 11 नवंबर 2017

Volume of sphere ( गोले का आयतन)

गोले का आयतन

सिद्धांत

संबंधित शब्दावलियां

गोला :

                                                                                                               

                                                                          

गोला एक पूरी तरह से गोल ज्यामितीय और वृत्ताकार वस्तु है जो त्रि-आयामी फैलाव में होता है और जो संपूर्ण रूप सेगोल गेंद की तरह दिखाई देता है।  

व्यास :  

व्यास एक सीधी रेखा होती है जो वृत्त या गोले के केंद्र से गुजरती है और प्रत्येक सिरे पर परिधि अथवा सतह से मिलती है।  

त्रिज्या :  

किसी गोले की त्रिज्या केंद्र और वृत्त या गोले पर स्थित किसी बिंदु के बीच एक रेखाखंड होती है।  

आयतन : 

गोले के आयतन को निम्न अनुसार परिभाषित किया जाता है :  V = ⁴/₃πr³

इस समीकरण में "V” आयतन को और "r” गोले की त्रिज्या को निरूपित करता है।

Scientist गणितज्ञ

एक गणितज्ञ वह व्यक्ति होता है जिसके अध्ययन और अनुसंधान का प्राथमिक क्षेत्र गणित ही रहता है।

लियोनार्ड यूलर को हमेशा से एक प्रसिद्ध गणितज्ञ माना गया है

गणित की समस्यायें

गणित के क्षेत्र में नयी खोजों का प्रकाशन बहुत ऊँची दर पर सैकडो वैज्ञानिक पत्रिकाओ (scientific journal) में जारी है। हाल ही में हुआ एक रोमांचक विकास है, एंड्रयू विल्स (proof) के द्वाराफ़र्मत की आखिरी प्रमेय (Fermat's Last Theorem) का प्रमाणित होना (Andrew Wiles), ३५० वर्षों से मेधावी गणितज्ञ इस समस्या को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।

गणित में कई प्रसिद्ध खुली समस्याएँ हैं, सैंकडों नहीं तो पिछले कुछ दशकों में तो हैं ही. कुछ उदाहरणों में शामिल हैं रिएमन्न परिकल्पना (Riemann hypothesis) (१८५९) और गोल्डबच का अनुमान(Goldbach's conjecture) (१७४२) .सहस्राब्दी पुरस्कार समस्याएँ (Millennium Prize Problems) गणित की पुरानी और महत्वपूर्ण समस्याओं पर प्रकाश डालता है और इनमें से किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए १,०००, ०००अमरीकी डॉलर का पुरस्कार देता है। इनमें से एक समस्या थी, रूसी गणितज्ञ Grigori पेरेलमान(Grigori Perelman) के द्वारा सिद्ध पोंकारे अनुमान (Poincaré conjecture) (१९०४), जो २००३ में एक पेपर में जारी की गई, समकक्ष समूह के द्वारा समीक्षा २००६ में पूरी हुई और प्रमाण को मानी स्वीकृत किया गया।

प्रेरणा

गणितज्ञ आमतौर पर गणित के पैटर्न के विवरण व खोज में और प्रमेय के प्रमाण ढूँढने में रूचि रखते हैं .अधिकतर प्रमेय और समस्याएँ स्वयं गणित से ही आते हैं या फिर सैद्धांतिक भौतिकी से प्रेरित होतें हैं(theoretical physics). कुछ हद तक, गणित की समस्याएं अर्थशास्त्रखेल और संगणक विज्ञान से आयी हैं.कुछ कठिन प्रश्न केवल इसलिए दिये जातें हैं ताकि उसे हल करने में चुनौती जैसा अनुभव हो I यद्यपि बहुत सी गणित तुंरत उपयोगी नहीं है, लेकिन इतिहास से पता चलता है कि गणित के अनुप्रयोग बाद में पता चल जाते हैं। उदहारण के लिए, ऐसा लगता है की संख्या सिद्धांत (number theory) का वास्तविक दुनिया में कोई उद्देश्य नहीं है, लेकिन कम्प्यूटर के विकास के बाद अल्गोरिद्म और बीज-लेखन में इसके महत्वपूर्ण अनुप्रयोग का पता चला.

गणितज्ञों को नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाता है Iफील्ड्स पदक (Fields Medal) गणित के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वश्रेष्ठ व् प्रतिष्ठित पुरस्कार है Iयह पदक जिसे कभी - कभी गणित का " नोबल पुरस्कार " भी कहा जाता है, प्रत्येक चार वर्ष में एक बार चार जवान गणितज्ञों को (४० वर्ष से कम), जो प्रतिभाशाली हैं, दिया जाता है। अन्य प्रमुख पुरस्कार हैं abel पुरस्कार (Abel Prize), नेमर्स पुरस्कार(Nemmers Prize), वुल्फ पुरस्कार (Wolf Prize), Schock पुरस्कार (Schock Prize) और नेवानलिना पुरस्कार (Nevanlinna Prize).

अंतर

गणित प्राकृतिक विज्ञान से भिन्न है, क्यों की विज्ञान में भौतिक सिद्धांतों को प्रयोगों के द्वारा जांचा जाता है, जबकि गणितीय तथ्यों को सत्यापित किया जाता है, यह कार्य गणितज्ञों को द्वारा किया जाता है। यदि किसी निश्चित तथ्य को गणितज्ञ के द्वारा सत्यापित कर दिया जाता है, (प्रारूपिक रूप से क्यों कि विशेष मामलों में कुछ हद तक सत्यापन किया गया है) लेकिन इसे सिद्ध या असिद्ध नहीं किया गया है, तो यह अनुमान (conjecture) कहलाता है: इसके विरोधाभास में एक सिद्ध तथ्य प्रमेय कहलाता है। भौतिक सिद्धांतों के बदलने की उम्मीद की जा सकती है जब कभी इस भौतिक संसार के बारे में कोई नई जानकारी प्राप्त होती है। गणित एक अलग तरीके से बदलती है: नए विचार पुराने विचारों को झूठ साबित नहीं कर सकते लेकिन ये किसी भी पूर्व ज्ञात तथ्य कोव्यापक बनाने में काम आते हैं। उदाहरण के लिए एक चर कलन, बहु चर कलन (multivariable calculus) में व्यापक हो जाता है, जो विश्लेषण पर बहु गुणित (manifold) हो जाता है।बीजीय रेखागणित (algebraic geometry) का अपने पारंपरिक रूप से आधुनिक रूप में विकास इस बात का एक अच्छा उदहारण है कि गणित का क्षेत्र मोलिक रूप से बदल जाता है, लेकिन यह इस बात को साबित नहीं करता कि पहले सत्यापित किया गया तथ्य किसी भी प्रकार से ग़लत है। हालांकि एक प्रमेय, जब एक बार सिद्ध हो जाती है, हमेशा के लिए सच बन जाती है, प्रमेय का वास्तविक अर्थ हमें गहराई से तब समझ में आता है, जब प्रमेय के चारों तरफ़ की गणित बढती है। एक गणितज्ञ महसूस करता है कि एक प्रमेय को ज्यादा बेहतर रूप से समझा जा सकता है जब यह पूर्व ज्ञात तथ्य पर विस्तृत रूप से लागू की जाती है। उदाहरण के लिए nonzero integers modulo a prime के लिएफर्मेट का लिटिल प्रमेय (Fermat's little theorem), युलर की प्रमेय (Euler's theorem) के रूप में व्यापक हो जाती है, जो invertible numbers modulo any nonzero integer, के लिए है। यही व्यापक होकर परिमित समूहों के लिए लाग्रेंग की प्रमेय (Lagrange's theorem) बन जाती है।

शुक्रवार, 20 अक्तूबर 2017

आयत की परिभाषा

आयत

आयत

आयतसंपादित करें

ऐसा चतुर्भुज जिसके चारों अंतः कोण समकोण हों उसे आयत कहते हैं।

आयत की विशेषताएंसंपादित करें

  • आयत की आमने सामने की भुजाएं सामान और समांतर होती हैं।
  • आयत के दोनों विकर्ण सामान होते है।
  • आयत के विकर्ण एक दूसरे को समद्विभाजित करते हैं।

आयत का क्षेत्रफल का सूत्रसंपादित करें

आयत का क्षेत्रफल = लंबाई x चौड़ाई

आयत का परिमापसंपादित करें

चारों भुजाओं के योग को परिमाप कहते हैं।
आयत की परिमाप =२ (लंबाई +चौड़ाई )

आयत से सम्बन्धित सूत्रसंपादित करें

आयत से सम्बन्धित सूत्र
भुजाएँ{\displaystyle a,\;b}
क्षेत्रफल{\displaystyle A\,=\,a\cdot b}
परिमाप{\displaystyle U\,=\,2\cdot a+2\cdot b=2\cdot (a+b)}
विकर्ण की लम्बाई{\displaystyle d\,=\,{\sqrt {a^{2}+b^{2}}}}
परिवृत्तकी त्रिज्या{\displaystyle r\,=\,{\frac {1}{2}}\cdot {\sqrt {a^{2}+b^{2}}}}